ग्वालियर में अवैध कॉलोनाइजरों पर पुलिस का शिकंजा: धनेली-करगवां में बिना अनुमति काटे जा रहे थे प्लॉट, 100 से ज्यादा लोगों को बेचे भूखंड
ग्वालियर के धनेली और करगवां में अवैध कॉलोनियों पर पुलिस की कार्रवाई। बिना अनुमति प्लॉट बेचने के मामले में 4 FIR दर्ज, आरोपियों की तलाश जारी।
ग्वालियर न्यूज़: मध्य प्रदेश के ग्वालियर जिले में अवैध कॉलोनी विकसित कर प्लॉट बेचने वालों के खिलाफ प्रशासन और पुलिस ने बड़ी कार्रवाई की है। जिले के धनेली और करगवां गांवों में बिना आवश्यक अनुमति और एनओसी के कॉलोनियां विकसित करने के मामले सामने आए हैं। शिकायतों और जांच के आधार पर बिजौली थाना पुलिस ने चार अलग-अलग एफआईआर दर्ज की हैं।
आरोप है कि संबंधित कॉलोनाइजरों ने बिना वैधानिक प्रक्रिया पूरी किए जमीन पर प्लॉट काटकर 100 से अधिक लोगों को बेच दिए। कलेक्टर न्यायालय के आदेश के बाद राजस्व विभाग की शिकायत पर पुलिस ने कार्रवाई की है।
धनेली में बिना रजिस्ट्रेशन विकसित की जा रही थी कॉलोनी
बिजौली थाना प्रभारी सौरभ श्रीवास्तव के अनुसार, धनेली गांव में बड़ागांव निवासी प्रदीप यादव पर अलग-अलग सर्वे नंबरों की जमीन पर बिना अनुमति कॉलोनी विकसित करने का आरोप है।
जांच में सामने आया कि संबंधित कॉलोनी का न तो आवश्यक रजिस्ट्रेशन कराया गया था और न ही नगर एवं ग्राम निवेश विभाग (T&CP) से लेआउट स्वीकृत कराया गया था।
इसी प्रकार सिकंदरा इंफ्राटेक के पार्टनर सुरेंद्र प्रजापति और रोशन लाल शिवहरे पर भी बिना आवश्यक अनुमति प्लॉट काटकर बेचने का आरोप है।
आरोप है कि कॉलोनाइजरों ने खरीदारों को सभी अनुमतियां होने की बात कहकर भूखंड बेचे, जबकि उनके पास आवश्यक एनओसी नहीं थी।
करगवां में भी अवैध प्लॉटिंग का मामला सामने आया
ग्वालियर के करगवां गांव में भी बिना अनुमति कॉलोनी विकसित करने के मामले सामने आए हैं।
जानकारी के अनुसार, अमोल सिंह यादव पर सर्वे नंबर 353/2/1, 353/1/2 और 353/2/2 की जमीन पर बिना अनुमति कॉलोनी विकसित करने का आरोप है।
प्रशासनिक जांच में अनियमितताएं सामने आने के बाद संबंधित मामले में कार्रवाई की गई।
इसके अलावा करगवां में सर्वे नंबर 216, 197/4, 201/2, 217 और 218/2 की जमीन पर बिना एनओसी और अनुमति कॉलोनी विकसित करने की शिकायत दर्ज कराई गई थी।
पटवारी वीरेंद्र सिंह कुशवाह ने कृष्णपुरी मुरार निवासी कॉलोनाइजर प्रमोद शर्मा और प्रफुल्ल शर्मा के खिलाफ शिकायत की थी। पुलिस ने जांच के बाद दोनों के खिलाफ मामला दर्ज किया है।
कलेक्टर न्यायालय के आदेश के बाद हुई कार्रवाई
अवैध कॉलोनियों से संबंधित चारों मामलों में कलेक्टर न्यायालय ने 24 सितंबर 2026 को कार्रवाई के आदेश दिए थे।
इसके बाद एसडीएम (राजस्व एवं दंडाधिकारी), मुरार ने 14 अक्टूबर 2026 को बिजौली थाना प्रभारी को आपराधिक प्रकरण दर्ज करने के निर्देश जारी किए।
राजस्व विभाग की शिकायत और प्रशासनिक जांच के आधार पर पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ मध्य प्रदेश पंचायत राज एवं ग्राम स्वराज अधिनियम, 1993 की धारा 61(घ) के तहत मामले दर्ज किए हैं।
पुलिस कर रही आरोपियों की तलाश
एसडीओपी बेहट मनीष यादव ने बताया कि प्रशासन के निर्देश पर अवैध कॉलोनी विकसित करने वाले कॉलोनाइजरों के खिलाफ प्रकरण दर्ज कर लिए गए हैं।
पुलिस नामजद आरोपियों की तलाश कर रही है। अधिकारियों के अनुसार, आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
प्लॉट खरीदने वालों के लिए जरूरी चेतावनी
ग्वालियर में अवैध कॉलोनियों के खिलाफ हुई इस कार्रवाई ने जमीन और प्लॉट खरीदने वालों के लिए भी महत्वपूर्ण सवाल खड़े किए हैं।
किसी भी कॉलोनी में प्लॉट खरीदने से पहले संबंधित जमीन का रिकॉर्ड, कॉलोनी की वैधानिक अनुमति, स्वीकृत लेआउट और आवश्यक एनओसी की जांच करना जरूरी है।
बिना अनुमति विकसित कॉलोनियों में प्लॉट खरीदने वाले लोगों को भविष्य में निर्माण अनुमति, सड़क, बिजली, पानी और अन्य बुनियादी सुविधाओं से संबंधित परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है।
फिलहाल पुलिस ने चार अलग-अलग मामले दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। आरोपों की अंतिम पुष्टि न्यायिक प्रक्रिया के बाद होगी।