ग्वालियर में किसान को हाईकोर्ट से बड़ी राहत! बैंक ने मांगे थे ₹8.59 लाख, खातों में बकाया मिला शून्य तो वसूली नोटिस रद्द
ग्वालियर हाईकोर्ट ने किसान लक्ष्मीनारायण मिश्रा को राहत दी। बैंक खातों में शून्य बकाया मिलने पर ₹8.59 लाख का वसूली नोटिस रद्द किया।
Gwalior News: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की ग्वालियर खंडपीठ ने किसान से बैंक ऋण की वसूली से जुड़े मामले में महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। बैंक ने किसान को 8 लाख 59 हजार 971 रुपये जमा करने का नोटिस जारी किया था, लेकिन न्यायालय में प्रस्तुत बैंक दस्तावेजों में संबंधित ऋण खातों का बकाया शून्य पाया गया।
इस विरोधाभास को देखते हुए हाईकोर्ट ने वर्ष 2012 में जारी बैंक के वसूली नोटिस को निरस्त कर दिया।
यह फैसला न्यायमूर्ति मिलिंद रमेश फड़के की एकलपीठ ने 29 अक्टूबर 2026 को सुनाया।
क्या है पूरा मामला?
मामला किसान लक्ष्मीनारायण मिश्रा से जुड़ा है, जिन्होंने बैंक से कृषि ऋण लिया था।
याचिकाकर्ता की ओर से पैरवी करने वाले अधिवक्ता एसएस गौतम के अनुसार, बैंक ने 15 मार्च 2012 को किसान को 8,59,971 रुपये जमा करने का नोटिस जारी किया था।
इससे पहले 5 जनवरी 2012 को बैंक अधिकारियों ने किसान का ट्रैक्टर भी जब्त कर लिया था।
बैंक की इस कार्रवाई और ऋण वसूली से संबंधित विवाद को लेकर मामला न्यायालय पहुंचा।
बैंक के दस्तावेजों में बकाया राशि निकली शून्य
मामले की सुनवाई के दौरान बैंक की ओर से प्रस्तुत दस्तावेजों में दोनों ऋण खाते बंद पाए गए।
दस्तावेजों के अनुसार, संबंधित ऋण खातों में बकाया राशि शून्य दर्ज थी।
इसके बावजूद बैंक ने किसान को लाखों रुपये जमा करने का नोटिस जारी किया था।
इसी विरोधाभास को लेकर न्यायालय में सवाल उठे।
हाईकोर्ट ने 2012 का वसूली नोटिस किया निरस्त
न्यायमूर्ति मिलिंद रमेश फड़के की एकलपीठ ने लक्ष्मीनारायण मिश्रा की याचिका पर सुनवाई करते हुए 29 अक्टूबर को आदेश पारित किया।
न्यायालय ने उपलब्ध दस्तावेजों और मामले के तथ्यों पर विचार करने के बाद 15 मार्च 2012 को जारी वसूली नोटिस निरस्त कर दिया।
इस फैसले से किसान को विवादित वसूली नोटिस से राहत मिली है।
किसान को एक लाख रुपये लौटाने के निर्देश
मामले में हाईकोर्ट ने किसान को एक लाख रुपये लौटाने के निर्देश भी दिए हैं।
हालांकि, उपलब्ध समाचार के स्क्रीनशॉट में इस राशि की वापसी से संबंधित विस्तृत शर्तें स्पष्ट नहीं हैं।
इसलिए भुगतान की प्रक्रिया और समयसीमा के संबंध में न्यायालय के मूल आदेश की पुष्टि आवश्यक है।
बैंक की कार्रवाई पर उठे सवाल
इस मामले में सबसे महत्वपूर्ण तथ्य यह सामने आया कि बैंक की ओर से वसूली नोटिस जारी किया गया था, जबकि न्यायालय में प्रस्तुत खातों के रिकॉर्ड में बकाया राशि शून्य दर्ज थी।
इस स्थिति ने बैंक की वसूली प्रक्रिया और खातों के रिकॉर्ड के बीच अंतर को सामने रखा।
मामला उन किसानों के लिए भी महत्वपूर्ण है, जिन्हें पुराने ऋण खातों या बैंक वसूली से संबंधित विवादों का सामना करना पड़ता है।
हालांकि, प्रत्येक मामले का निर्णय उसके दस्तावेजों और परिस्थितियों के आधार पर ही होता है।
14 साल पुराने मामले में किसान को राहत
वर्ष 2012 में जारी नोटिस से शुरू हुआ यह विवाद वर्ष 2026 में हाईकोर्ट के फैसले तक पहुंचा।
करीब 14 साल पुराने इस मामले में अदालत ने बैंक के वसूली नोटिस को निरस्त कर किसान को राहत प्रदान की है।
Digital Gwalior News: ग्वालियर हाईकोर्ट के इस फैसले में बैंक दस्तावेजों की अहम भूमिका रही। खातों में बकाया राशि शून्य दर्ज होने के बावजूद जारी ₹8.59 लाख के वसूली नोटिस को अदालत ने निरस्त कर दिया।
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