आखिर सरकार हमसे 1 लीटर पेट्रोल पर कितना टैक्स लेती है? MP में महंगा और UP में सस्ता क्यों ?
मध्य प्रदेश (MP) में पेट्रोल पर VAT लगभग 30% के आसपास है, साथ ही ₹2–3 प्रति लीटर अतिरिक्त सेस भी लगाया जाता है, जिससे कुल टैक्स लगभग ₹25–30 प्रति लीटर तक पहुंच जाता है। इसी वजह से MP में पेट्रोल आमतौर पर महंगे राज्यों में गिना जाता है।
आखिर सरकार हमसे लीटर पेट्रोल पर कितना टैक्स लेती है? MP में महंगा और UP में सस्ता क्यों ?
भारत में पेट्रोल पर टैक्स दो हिस्सों में लिया जाता है—केंद्र सरकार और राज्य सरकार। केंद्र सरकार पेट्रोल पर एक्साइज ड्यूटी (Excise Duty) लगाती है, जो लगभग ₹19–20 प्रति लीटर होती है और इसमें बेसिक एक्साइज के साथ रोड और इंफ्रास्ट्रक्चर सेस भी शामिल होता है। यह टैक्स पूरे देश में लगभग समान रहता है। वहीं, राज्य सरकारें पेट्रोल पर वैट (VAT – Value Added Tax) लगाती हैं, जो हर राज्य में अलग-अलग होता है और आमतौर पर ₹15 से ₹30 प्रति लीटर के बीच रहता है। उदाहरण के लिए, मध्य प्रदेश में यह लगभग ₹25–30 प्रति लीटर, दिल्ली में ₹15–20 और महाराष्ट्र में ₹25 या उससे अधिक हो सकता है।
अगर कुल टैक्स की बात करें तो पेट्रोल के एक लीटर पर लगभग ₹35 से ₹50 तक टैक्स लगता है। मान लीजिए पेट्रोल की कीमत ₹105 प्रति लीटर है, तो उसमें बेस प्राइस लगभग ₹50–55, टैक्स ₹40–50 और डीलर कमीशन ₹3–4 होता है। आसान भाषा में समझें तो आप जो पेट्रोल खरीदते हैं, उसका करीब 40% से 50% हिस्सा सिर्फ टैक्स होता है। एक महत्वपूर्ण बात यह भी है कि पेट्रोल और डीज़ल अभी जीएसटी (GST) के अंतर्गत नहीं आते, इसलिए केंद्र और राज्य दोनों अलग-अलग टैक्स वसूलते हैं।
मध्य प्रदेश (MP) में पेट्रोल पर VAT लगभग 30% के आसपास है, साथ ही ₹2–3 प्रति लीटर अतिरिक्त सेस भी लगाया जाता है, जिससे कुल टैक्स लगभग ₹25–30 प्रति लीटर तक पहुंच जाता है। इसी वजह से MP में पेट्रोल आमतौर पर महंगे राज्यों में गिना जाता है। अगर अन्य राज्यों से तुलना करें, तो दिल्ली में VAT करीब 19–20% है और कुल टैक्स ₹15–18 प्रति लीटर के बीच रहता है, इसलिए वहां पेट्रोल MP की तुलना में काफी सस्ता होता है। महाराष्ट्र में VAT लगभग 25–30% के साथ सेस भी लगता है, जिससे कुल टैक्स ₹25–30 तक होता है, यानी यह MP जैसा या थोड़ा महंगा हो सकता है। गुजरात में VAT लगभग 20–22% है और कुल टैक्स ₹18–22 के बीच रहता है, इसलिए यह MP से सस्ता पड़ता है। राजस्थान में VAT 30% से अधिक है और कुल टैक्स ₹28–32 प्रति लीटर तक पहुंच जाता है, जिससे यह देश के सबसे महंगे राज्यों में शामिल है। वहीं उत्तर प्रदेश में VAT करीब 26–27% है और कुल टैक्स ₹22–26 के बीच रहता है, जो MP से थोड़ा सस्ता है।
अगर पूरे भारत में तुलना करें तो MP, राजस्थान और महाराष्ट्र जैसे राज्य हाई टैक्स कैटेगरी में आते हैं, जहां पेट्रोल महंगा मिलता है, जबकि दिल्ली और गुजरात जैसे राज्यों में टैक्स कम होने के कारण पेट्रोल अपेक्षाकृत सस्ता होता है। MP में पेट्रोल महंगा होने के पीछे मुख्य कारण हैं—उच्च VAT और अतिरिक्त सेस, राज्य सरकार की अधिक राजस्व जरूरत, और यह एक landlocked राज्य है जहां कोई पोर्ट नहीं है, जिससे ट्रांसपोर्टेशन लागत भी बढ़ जाती है। कुल मिलाकर निष्कर्ष यही है कि टैक्स स्ट्रक्चर के कारण अलग-अलग राज्यों में पेट्रोल की कीमतों में बड़ा अंतर देखने को मिलता है।
भारत और दुनिया के अन्य देशों में पेट्रोल टैक्स की तुलना को आसान तरीके से समझें तो भारत में पेट्रोल पर कुल टैक्स लगभग 40%–50% के बीच होता है, जिसमें केंद्र सरकार की एक्साइज ड्यूटी और राज्य सरकार का VAT दोनों शामिल होते हैं। इसका मतलब है कि आप जो पेट्रोल खरीदते हैं, उसका लगभग आधा हिस्सा टैक्स में चला जाता है। वहीं United States में पेट्रोल पर टैक्स काफी कम, लगभग 10%–20% के बीच होता है, इसलिए वहां पेट्रोल अपेक्षाकृत सस्ता लगता है। दूसरी ओर United Kingdom में टैक्स 60%–65% तक होता है, जो दुनिया में सबसे ज्यादा में से एक है, जबकि Germany में यह लगभग 55%–60% रहता है, जहां पर्यावरण और ग्रीन एनर्जी को बढ़ावा देने के लिए हाई टैक्स लगाया जाता है।
अगर हम मिडिल ईस्ट देशों की बात करें तो United Arab Emirates में पेट्रोल पर टैक्स केवल 5%–10% के बीच होता है और Saudi Arabia में यह लगभग 5% ही है, क्योंकि इन देशों के पास खुद का तेल भंडार है, जिससे पेट्रोल बहुत सस्ता मिलता है। कुल मिलाकर, भारत को मिड-रेंज टैक्स देश माना जा सकता है, जहां टैक्स न बहुत ज्यादा है और न बहुत कम, जबकि अमेरिका में टैक्स कम होने से पेट्रोल सस्ता है, यूरोप के देशों में टैक्स बहुत ज्यादा है, और UAE व सऊदी अरब जैसे देशों में अपने तेल संसाधनों के कारण टैक्स बहुत कम रखा जाता है। अंत में, यह समझना जरूरी है कि पेट्रोल की कीमत सिर्फ टैक्स से तय नहीं होती, बल्कि इस पर यह भी निर्भर करता है कि देश के पास खुद का तेल है या नहीं, सरकार की नीतियां क्या हैं, आयात पर कितनी निर्भरता है और करेंसी की वैल्यू (₹ बनाम $) क्या है।