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PM USHA Scheme: ग्वालियर के जीवाजी विश्वविद्यालय में 10 करोड़ के 800 कंप्यूटर बेकार पड़े, छात्रों को नहीं मिल रहा लाभ

ग्वालियर के जीवाजी विश्वविद्यालय में PM USHA योजना के तहत 10 करोड़ में खरीदे गए 800 कंप्यूटरों का इंस्टॉलेशन अधूरा। छात्रों को नहीं मिल रहा लाभ।

मध्य प्रदेश के ग्वालियर स्थित जीवाजी विश्वविद्यालय में पीएम ऊषा योजना (PM USHA Scheme) के तहत करीब 10 करोड़ रुपये की लागत से खरीदे गए 800 कंप्यूटरों का पूरा लाभ छात्रों को नहीं मिल पा रहा है। लगभग आठ महीने पहले खरीदे गए इन कंप्यूटरों में से अधिकांश अभी भी स्टोर में रखे हुए हैं। कुछ कंप्यूटर विश्वविद्यालय के विभागों तक पहुंच चुके हैं, लेकिन उनका इंस्टॉलेशन नहीं किया गया है। ऐसे में करोड़ों रुपये खर्च करने के बावजूद डिजिटल शिक्षा सुविधाओं का लाभ छात्रों तक नहीं पहुंचने पर सवाल उठ रहे हैं।

पीएम ऊषा योजना के तहत खरीदे गए थे 800 कंप्यूटर

प्राप्त जानकारी के अनुसार, जीवाजी विश्वविद्यालय ने प्रधानमंत्री उच्चतर शिक्षा अभियान (PM USHA) के अंतर्गत करीब 10 करोड़ रुपये की लागत से 800 कंप्यूटर खरीदे थे।

इन कंप्यूटरों को विश्वविद्यालय के विभिन्न विभागों और डिजिटल सेल्फ स्टडी सेंटर में स्थापित करने की योजना बनाई गई थी, ताकि छात्रों को आधुनिक तकनीक और डिजिटल शिक्षा की बेहतर सुविधाएं मिल सकें।

योजना के अनुसार कंप्यूटरों का वितरण इस प्रकार होना था:

  • 400 कंप्यूटर: विश्वविद्यालय के विभिन्न विभागों में कंप्यूटर लैब और कार्यालय उपयोग के लिए।

  • 400 कंप्यूटर: डिजिटल सेल्फ स्टडी सेंटर में छात्रों के अध्ययन और डिजिटल संसाधनों के उपयोग के लिए।

हालांकि, कंप्यूटरों की खरीद के कई महीने बीत जाने के बाद भी निर्धारित स्थानों पर इनका उपयोग शुरू नहीं हो पाया है।

आठ महीने बाद भी स्टोर में रखे हैं अधिकांश कंप्यूटर

रिपोर्ट के मुताबिक, विश्वविद्यालय को करीब सात से आठ महीने पहले कंप्यूटरों की डिलीवरी मिल गई थी। इसके बावजूद अधिकांश कंप्यूटर अब भी स्टोर में रखे हुए हैं।

कुछ कंप्यूटर संबंधित विभागों तक पहुंचाए गए हैं, लेकिन वहां भी उन्हें इंस्टॉल नहीं किया गया है।

इस स्थिति के कारण कंप्यूटर लैब और डिजिटल अध्ययन सुविधाओं के विस्तार की योजना प्रभावित हो रही है।

चार महीने बाद खत्म हो सकती है कंप्यूटरों की वारंटी

इस पूरे मामले में एक बड़ी चिंता कंप्यूटरों की वारंटी को लेकर सामने आई है।

रिपोर्ट के अनुसार, कंप्यूटरों की वारंटी समाप्त होने में लगभग चार महीने का समय बचा है। ऐसे में बिना इस्तेमाल के ही वारंटी अवधि का बड़ा हिस्सा बीत चुका है।

यदि समय रहते कंप्यूटरों को इंस्टॉल नहीं किया गया, तो भविष्य में तकनीकी खराबी आने पर विश्वविद्यालय को अतिरिक्त खर्च उठाना पड़ सकता है।

इससे सरकारी धन के प्रभावी उपयोग को लेकर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।

डिजिटल सेल्फ स्टडी सेंटर की सुविधाओं से वंचित छात्र

पीएम ऊषा योजना के अंतर्गत विश्वविद्यालय में डिजिटल शिक्षा को बढ़ावा देने के उद्देश्य से 400 कंप्यूटर डिजिटल सेल्फ स्टडी सेंटर के लिए निर्धारित किए गए थे।

इन कंप्यूटरों के माध्यम से छात्रों को ऑनलाइन अध्ययन सामग्री, डिजिटल रिसर्च, ई-लर्निंग और अन्य शैक्षणिक संसाधनों तक पहुंच मिल सकती है।

लेकिन कंप्यूटरों का उपयोग शुरू नहीं होने से छात्रों को प्रस्तावित सुविधाओं का लाभ नहीं मिल पा रहा है।

विश्वविद्यालय प्रबंधन और विभागाध्यक्षों की कार्यप्रणाली पर सवाल

कंप्यूटरों की खरीद और उनके इंस्टॉलेशन में देरी को लेकर जीवाजी विश्वविद्यालय के प्रबंधन और संबंधित विभागाध्यक्षों की कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं।

रिपोर्ट के अनुसार, कंप्यूटरों के लिए आवश्यक इंफ्रास्ट्रक्चर पूरी तरह तैयार नहीं होने के कारण इन्हें निर्धारित स्थानों पर स्थापित नहीं किया जा सका है।

ऐसे में सवाल उठता है कि करोड़ों रुपये के कंप्यूटर खरीदने से पहले उनके इंस्टॉलेशन और उपयोग के लिए जरूरी व्यवस्थाएं क्यों सुनिश्चित नहीं की गईं।

हालांकि, इस मामले में विश्वविद्यालय प्रशासन का विस्तृत आधिकारिक पक्ष उपलब्ध जानकारी में सामने नहीं आया है।

क्या है पीएम ऊषा योजना?

प्रधानमंत्री उच्चतर शिक्षा अभियान (PM USHA) केंद्र सरकार की एक योजना है, जिसका उद्देश्य देश के उच्च शिक्षण संस्थानों में शिक्षा की गुणवत्ता और आधारभूत सुविधाओं को बेहतर बनाना है।

इस योजना के माध्यम से विश्वविद्यालयों और कॉलेजों को आधुनिक तकनीक, डिजिटल संसाधन, प्रयोगशालाओं और अन्य शैक्षणिक सुविधाओं के विकास के लिए वित्तीय सहायता प्रदान की जाती है।

इसका प्रमुख उद्देश्य उच्च शिक्षा को अधिक गुणवत्तापूर्ण, सुलभ और तकनीक-सक्षम बनाना है।

छात्रों को कब मिलेगा 800 कंप्यूटरों का लाभ?

जीवाजी विश्वविद्यालय में 800 कंप्यूटरों की खरीद के बाद भी उनका पूरा उपयोग शुरू नहीं होना चिंता का विषय बना हुआ है।

एक ओर विश्वविद्यालय में डिजिटल शिक्षा सुविधाओं को मजबूत करने के लिए करोड़ों रुपये खर्च किए गए हैं, वहीं दूसरी ओर कंप्यूटरों का इंस्टॉलेशन अधूरा होने से छात्र इन सुविधाओं का लाभ नहीं उठा पा रहे हैं।

अब देखना होगा कि विश्वविद्यालय प्रशासन कब तक आवश्यक इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार करके कंप्यूटरों का इंस्टॉलेशन पूरा करता है और छात्रों के लिए डिजिटल अध्ययन सुविधाएं शुरू करता है।

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नोट: यह रिपोर्ट 4 नवंबर 2026 को प्रकाशित समाचार में दी गई जानकारी पर आधारित है। कंप्यूटरों की वर्तमान इंस्टॉलेशन स्थिति और विश्वविद्यालय प्रशासन की प्रतिक्रिया की स्वतंत्र पुष्टि शेष है।