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ग्वालियर में 25 हजार ठेलों से सड़कें सिमटीं! हाईकोर्ट पहुंचा अतिक्रमण का मामला, याचिकाकर्ता ने मांगी वेंडर्स की सूची और रसीदों का रिकॉर्ड

ग्वालियर में 25 हजार ठेलों और सड़क अतिक्रमण का मामला हाईकोर्ट पहुंचा। याचिकाकर्ता ने 11 वेंडिंग जोन, वेंडर्स की सूची और रसीदों का रिकॉर्ड मांगा।

ग्वालियर। शहर के प्रमुख बाजारों में बढ़ते अतिक्रमण और अव्यवस्थित स्ट्रीट वेंडिंग को लेकर मामला मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की ग्वालियर खंडपीठ पहुंच गया है। शहर में करीब 25 हजार से अधिक ठेले लगने और मुख्य सड़कों पर अतिक्रमण के कारण यातायात प्रभावित होने का मुद्दा जनहित याचिका के माध्यम से उठाया गया है।

याचिकाकर्ता ने नगर निगम द्वारा विकसित वेंडिंग जोन, वेंडर्स की सूची और उनसे वसूली गई राशि की रसीदों का रिकॉर्ड उपलब्ध कराने की मांग की है। साथ ही शहर की सड़कों, चौराहों और फुटपाथों को अतिक्रमण मुक्त बनाने के लिए ठोस व्यवस्था लागू करने की मांग की गई है।

25 हजार से ज्यादा ठेलों से यातायात प्रभावित होने का दावा

याचिका में दावा किया गया है कि ग्वालियर के प्रमुख बाजारों में अवैध अतिक्रमण और अनियोजित ठेला व्यवस्था के कारण सड़कों की चौड़ाई लगातार कम होती जा रही है।

शहर की कई प्रमुख सड़कों पर ठेलों और दुकानों के बाहर रखे सामान के कारण वाहन चालकों और पैदल यात्रियों को परेशानी का सामना करना पड़ता है।

याचिका के अनुसार, कुछ स्थानों पर करीब 7 मीटर चौड़ी सड़क सिमटकर महज 2 से 3 मीटर रह जाती है। इससे बाजारों में यातायात जाम की स्थिति बनती है।

11 वेंडिंग जोन बनाए, फिर भी सड़कों पर कब्जे का आरोप

जानकारी के अनुसार, ग्वालियर नगर निगम ने करोड़ों रुपये खर्च करके शहर में 11 वेंडिंग जोन विकसित किए हैं।

इनमें नेहरू पार्क, पिंटो पार्क, लक्ष्मण तलैया, इंटक मैदान, हजीरा और विनय नगर सहित विभिन्न क्षेत्रों के वेंडिंग जोन शामिल हैं।

इन वेंडिंग जोन में करीब 1,470 वेंडर्स को व्यवस्थित तरीके से बैठाने की योजना बनाई गई थी।

हालांकि, याचिका में आरोप लगाया गया है कि वेंडिंग जोन तैयार होने के बावजूद कई स्थानों पर ठेले अब भी सड़कों और बाजारों में लगाए जा रहे हैं, जिससे यातायात प्रभावित हो रहा है।

याचिकाकर्ता ने हाईकोर्ट से की तीन प्रमुख मांगें

याचिकाकर्ता की ओर से अदालत के सामने तीन प्रमुख मांगें रखी गई हैं।

1. सख्त SOP तैयार की जाए

सड़कों, चौराहों और फुटपाथों को स्थायी रूप से अतिक्रमण मुक्त कराने के लिए स्पष्ट मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) तैयार कर उसे लागू किया जाए।

2. अधिकारियों की जवाबदेही तय हो

मुख्य सड़कों पर अवैध दुकानें या ठेले लगने की स्थिति में संबंधित थाना प्रभारी, ट्रैफिक इंचार्ज और नगर निगम के वार्ड अधिकारियों की जवाबदेही तय करने की मांग की गई है।

3. वेंडिंग जोन की शिफ्टिंग सुनिश्चित हो

सभी स्ट्रीट वेंडर्स को नगर निगम द्वारा निर्धारित वेंडिंग जोन में स्थानांतरित करने और वहां बैठाने की व्यवस्था सुनिश्चित करने की मांग की गई है।

ये याचिकाकर्ता की मांगें हैं; इन्हें हाईकोर्ट द्वारा पारित आदेश नहीं माना जाना चाहिए।

वेंडर्स की सूची और वसूली की रसीदों का रिकॉर्ड मांगा

याचिका में नगर निगम की वेंडिंग व्यवस्था और राजस्व संग्रहण से संबंधित रिकॉर्ड पर भी सवाल उठाए गए हैं।

याचिकाकर्ता ने मांग की है कि नगर निगम द्वारा पंजीकृत वेंडर्स की सूची, उनसे वसूली गई राशि और जारी की गई रसीदों का पूरा विवरण उपलब्ध कराया जाए।

इससे यह स्पष्ट हो सकेगा कि शहर में कितने वेंडर्स अधिकृत रूप से व्यवसाय कर रहे हैं और निर्धारित वेंडिंग जोन का कितना उपयोग हो रहा है।

महाराज बाड़ा से हजीरा तक जाम की समस्या

याचिका में शहर के कई प्रमुख बाजारों का उल्लेख किया गया है, जहां अतिक्रमण के कारण आवागमन प्रभावित होने का दावा है।

इनमें महाराज बाड़ा, दौलतगंज, टोपी बाजार, नजरबाग, सराफा, मुरार, हजीरा, शिंदे की छावनी, कंपू रोड, पड़ाव और लक्ष्मीगंज सब्जी मंडी जैसे व्यस्त इलाके शामिल हैं।

इन बाजारों में ठेलों और दुकानों के बाहर रखे सामान के कारण सड़कें संकरी होने तथा वाहनों को निकलने में परेशानी होने की बात कही गई है।

नगर निगम अधिनियम और स्ट्रीट वेंडर्स एक्ट का मुद्दा

याचिका में मध्य प्रदेश नगर पालिक निगम अधिनियम, 1956 और स्ट्रीट वेंडर्स से संबंधित कानूनों के प्रावधानों के पालन का मुद्दा भी उठाया गया है।

याचिकाकर्ता का कहना है कि सार्वजनिक स्थानों पर अतिक्रमण रोकने और स्ट्रीट वेंडर्स के लिए निर्धारित व्यवस्था लागू करने में संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही सुनिश्चित की जानी चाहिए।

हालांकि, सड़कें अतिक्रमण मुक्त कराने के साथ-साथ स्ट्रीट वेंडर्स की आजीविका और कानूनी अधिकारों का संरक्षण भी आवश्यक है।

हाईकोर्ट में क्या होगा अगला कदम?

दौलतगंज निवासी व्यापारी पुरुषोत्तम जैन ने अधिवक्ता अवधेश सिंह तोमर के माध्यम से हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर की है।

याचिका में नगर निगम, पुलिस और जिला प्रशासन से संबंधित मुद्दों को उठाते हुए अतिक्रमण की समस्या में हस्तक्षेप और प्रभावी व्यवस्था लागू करने की मांग की गई है।

अब इस मामले में हाईकोर्ट की आगामी कार्यवाही महत्वपूर्ण होगी। उपलब्ध जानकारी में अदालत द्वारा इन मांगों पर कोई अंतिम आदेश पारित किए जाने की पुष्टि नहीं है।

सवाल यह है कि ग्वालियर में करोड़ों रुपये खर्च कर वेंडिंग जोन बनाए जाने के बावजूद बाजारों में यातायात व्यवस्था कब सुधरेगी और सड़क पर चलने वाले नागरिकों तथा स्ट्रीट वेंडर्स, दोनों के हितों का संतुलन कैसे सुनिश्चित होगा?