MP में अगले 20 साल का सड़क विकास प्लान तैयार होगा: 55 हजार KM सड़कों का सर्वे, 400 स्थानों पर होगी ट्रैफिक की गिनती
मध्य प्रदेश में 2027 से 2047 तक सड़क विकास का मास्टर प्लान तैयार होगा। 55 हजार KM सड़कों का सर्वे और 400 स्थानों पर ट्रैफिक की गिनती होगी।
ग्वालियर/भोपाल। मध्य प्रदेश में सड़क नेटवर्क को आधुनिक और मजबूत बनाने के लिए राज्य सरकार अगले 20 वर्षों का व्यापक रोड नेटवर्क मास्टर प्लान तैयार करने जा रही है। इस योजना के तहत वर्ष 2027 से 2047 तक प्रदेश की सड़कों के विकास, यातायात प्रबंधन और भविष्य की परिवहन जरूरतों को ध्यान में रखते हुए रणनीति बनाई जाएगी।
मध्य प्रदेश रोड डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन (MPRDC) ने इसके लिए कंसल्टेंसी सेवाओं के चयन की प्रक्रिया शुरू कर दी है। योजना के अंतर्गत प्रदेश की लगभग 55 हजार किलोमीटर सड़कों का सर्वे किया जाएगा। इसके अलावा करीब 25 हजार किलोमीटर अतिरिक्त सड़क नेटवर्क का अध्ययन भी प्रस्तावित है।
18 महीने में तैयार होगा रोड नेटवर्क मास्टर प्लान
मध्य प्रदेश रोड डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन ने अगले 20 वर्षों की सड़क विकास आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए मास्टर प्लान तैयार करने की प्रक्रिया शुरू की है।
इस मास्टर प्लान को तैयार करने का लक्ष्य 18 महीने निर्धारित किया गया है। इसके लिए सड़क नेटवर्क, यातायात की स्थिति, भविष्य में बढ़ने वाले वाहनों की संख्या और औद्योगिक विकास जैसे महत्वपूर्ण पहलुओं का अध्ययन किया जाएगा।
MPRDC और मध्य प्रदेश ग्रामीण सड़क विकास प्राधिकरण के रोड एसेट मैनेजमेंट सिस्टम (RAMS) में लगभग 30 हजार किलोमीटर स्टेट हाईवे और प्रमुख जिला मार्गों का डेटा पहले से उपलब्ध है।
इस डेटा को अपडेट करने के साथ लगभग 25 हजार किलोमीटर अतिरिक्त सड़क नेटवर्क का फील्ड सर्वे कराया जाएगा।
400 स्थानों पर होगी यातायात की गिनती
प्रदेश में सड़कों की वास्तविक स्थिति और यातायात के दबाव को समझने के लिए करीब 400 स्थानों पर ट्रैफिक सर्वे कराया जाएगा।
सर्वे के दौरान इन महत्वपूर्ण बिंदुओं का अध्ययन होगा:
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सड़कों की लंबाई, चौड़ाई और सतह की स्थिति।
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वाहनों की संख्या और यातायात का दबाव।
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पुल-पुलियों की स्थिति और सड़क सुरक्षा।
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दुर्घटना संभावित क्षेत्रों की पहचान।
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सड़क नेटवर्क की कनेक्टिविटी और भविष्य की जरूरतें।
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शहरों और ग्रामीण क्षेत्रों के बीच यातायात की स्थिति।
इसके लिए ऑटोमैटिक ट्रैफिक काउंटिंग और क्लासिफिकेशन (ATCC) सर्वे की तकनीक का उपयोग किया जाएगा।
लगातार सात दिनों तक 24 घंटे वाहनों की गिनती कर यह पता लगाया जाएगा कि किन मार्गों पर कितना यातायात है और किस प्रकार के वाहन अधिक चलते हैं।
नए बायपास, रिंग रोड और मिसिंग लिंक की होगी पहचान
मास्टर प्लान के तहत प्रदेश में ऐसे मार्गों की पहचान की जाएगी, जहां यातायात का दबाव अधिक है और भविष्य में सड़क नेटवर्क के विस्तार की आवश्यकता हो सकती है।
इस अध्ययन के आधार पर नए बायपास, रिंग रोड, वैकल्पिक मार्ग और मिसिंग लिंक की जरूरत का आकलन किया जाएगा।
साथ ही पुराने पुलों के चौड़ीकरण, नए पुलों के निर्माण और सड़क कनेक्टिविटी को बेहतर बनाने की संभावनाओं पर भी विचार किया जाएगा।
प्राकृतिक आपदाओं और अन्य कारणों से प्रभावित होने वाले सड़क क्षेत्रों में वैकल्पिक मार्ग विकसित करने की संभावनाएं भी तलाशी जाएंगी।
औद्योगिक विकास, पर्यटन और कृषि परिवहन पर भी फोकस
राज्य सरकार की इस दीर्घकालिक योजना में केवल सड़कों के निर्माण पर ही नहीं, बल्कि आर्थिक विकास और परिवहन व्यवस्था को बेहतर बनाने पर भी ध्यान दिया जाएगा।
योजना के तहत औद्योगिक क्लस्टर, कृषि मंडियों, खनन क्षेत्रों, गोदामों, ट्रक टर्मिनलों और लॉजिस्टिक्स पार्कों की जरूरतों का अध्ययन किया जाएगा।
इसके अलावा पर्यटन स्थलों और प्रमुख शहरों को जोड़ने वाले मार्गों की कनेक्टिविटी बेहतर बनाने की संभावनाओं का भी आकलन होगा।
50 से अधिक ट्रांसपोर्ट कंपनियों, ऑपरेटरों और माल परिवहन से जुड़े संगठनों से चर्चा कर उनकी आवश्यकताओं को समझा जाएगा।
2032, 2037 और 2047 के लिए बनेगी विकास रणनीति
कंसल्टेंट सड़क नेटवर्क की मौजूदा स्थिति का आकलन करने के बाद वर्ष 2032, 2037 और 2047 के लिए यातायात की संभावित मांग का अनुमान तैयार करेगा।
इस आधार पर सड़कों के विकास की प्राथमिकताएं तय की जाएंगी।
योजना में अल्पकालीन, मध्यमकालीन और दीर्घकालीन विकास कार्यों की रूपरेखा तैयार होगी, ताकि भविष्य में बढ़ते यातायात दबाव के अनुसार सड़क नेटवर्क विकसित किया जा सके।
ग्वालियर-चंबल क्षेत्र को भी मिल सकता है लाभ
प्रदेश स्तर पर तैयार होने वाला यह रोड नेटवर्क मास्टर प्लान ग्वालियर-चंबल अंचल के लिए भी महत्वपूर्ण साबित हो सकता है।
ग्वालियर, मुरैना, भिंड, दतिया और आसपास के क्षेत्रों में सड़क कनेक्टिविटी, भारी वाहनों के आवागमन और भविष्य के बायपास तथा रिंग रोड की जरूरतों का आकलन इस व्यापक योजना के अंतर्गत किया जा सकता है।
हालांकि, ग्वालियर-चंबल क्षेत्र में किन विशिष्ट सड़क परियोजनाओं को मंजूरी मिलेगी, इसकी जानकारी अभी सामने नहीं आई है। मास्टर प्लान तैयार होने और प्राथमिकताएं तय होने के बाद ही प्रस्तावित कार्यों की स्थिति स्पष्ट होगी।
भविष्य की जरूरतों के अनुसार विकसित होगा सड़क नेटवर्क
मध्य प्रदेश सरकार की यह पहल प्रदेश में सड़क विकास की लंबी अवधि की योजना तैयार करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।
यदि मास्टर प्लान के आधार पर सड़क परियोजनाओं को प्रभावी ढंग से लागू किया जाता है, तो इससे यातायात व्यवस्था, सड़क सुरक्षा, माल परिवहन, पर्यटन और औद्योगिक विकास को लाभ मिल सकता है।