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ग्वालियर में ऑनलाइन कमाई का झांसा: मां-बेटी से 1.27 लाख की ठगी, टास्क के नाम पर बनाया शिकार

ग्वालियर के महाराजपुरा में ऑनलाइन शॉपिंग ऐप के जरिए पार्ट-टाइम जॉब का लालच देकर मां-बेटी से 1.27 लाख रुपये की ठगी। जानें कैसे साइबर ठगों ने टास्क के नाम पर फंसाया।

ग्वालियर शहर के महाराजपुरा थाना अंतर्गत गजराज विहार इलाके में साइबर ठगी का एक गंभीर मामला सामने आया है, जहाँ ऑनलाइन कमाई का झांसा देकर मां-बेटी को सवा लाख रुपये से अधिक का चूना लगाया गया। यह घटना डिजिटल युग में बढ़ रहे 'पार्ट-टाइम जॉब स्कैम' की ओर इशारा करती है, जिसमें ठग नामी कंपनियों के नाम का सहारा लेकर लोगों को अपना शिकार बनाते हैं।

पीड़ित महिला ऊषा सिंह (50) और उनकी बेटी मानसी सिंह ने पुलिस को दी गई शिकायत में बताया कि ठगी की शुरुआत 18 जून 2026 को हुई। मानसी ने अपने फोन में मिंत्रा (Myntra) शॉपिंग एप्लीकेशन डाउनलोड किया था। इसी दौरान एक अज्ञात व्यक्ति ने उनसे संपर्क साधा। आरोपी ने खुद को एक ऑनलाइन प्लेटफॉर्म का प्रतिनिधि बताते हुए मानसी को लुभावने ऑफर दिए। उसने दावा किया कि यदि वे घर बैठे कुछ ऑनलाइन कोर्स और छोटे-छोटे टास्क पूरे करती हैं, तो उन्हें बदले में भारी कमीशन और मोटी कमाई होगी।

शुरुआत में ठगों ने बहुत ही चालाकी से काम किया। पहले कुछ छोटे टास्क पूरे करवाए और मानसी के खाते में कुछ राशि कमीशन के रूप में भेज दी। इससे मां-बेटी का भरोसा जीत लिया गया। एक बार भरोसा कायम होने के बाद, ठग ने 'बड़ा मुनाफा' कमाने का लालच देकर उन्हें बड़े इन्वेस्टमेंट के लिए प्रेरित किया। धीरे-धीरे उन्हें टास्क की जटिलता और निवेश राशि को बढ़ाने के लिए कहा गया।

आरोपी के झांसे में आकर मानसी और उनकी मां ऊषा सिंह ने 18 और 19 जून को अपने SBI बैंक खातों से कई अलग-अलग बैंक खातों में पैसे ट्रांसफर किए। कुल मिलाकर उन्होंने 1,27,248 रुपये ठगों को सौंप दिए। ठगी का अहसास तब हुआ जब निवेश की गई राशि और वादा किया गया कमीशन वापस नहीं मिला। जब पीड़ितों ने आरोपी से सख्ती से सवाल-जवाब किए, तो आरोपी का व्यवहार संदिग्ध हो गया और उसने बहाने बनाना शुरू कर दिया।

पीड़ित परिवार ने महाराजपुरा थाने में पहुंचकर रिपोर्ट दर्ज कराई है। पुलिस ने अज्ञात आरोपियों के खिलाफ धोखाधड़ी (Cyber Fraud) का मामला दर्ज कर लिया है। पुलिस अब उन बैंक खातों की जांच कर रही है जिनमें पैसे ट्रांसफर किए गए थे। साइबर सेल की मदद से उन मोबाइल नंबरों और ट्रांजेक्शन ट्रेल को ट्रेस किया जा रहा है, ताकि ठगों तक पहुंचा जा सके।

यह मामला एक बार फिर साबित करता है कि ऑनलाइन शॉपिंग ऐप या सोशल मीडिया के माध्यम से आने वाली 'घर बैठे कमाई' की स्कीम अक्सर फर्जी होती हैं। कोई भी वैध प्लेटफॉर्म काम देने के बदले कभी भी पैसे की मांग नहीं करता है।