ग्वालियर हाईकोर्ट से कांग्रेस नेता डॉ. गोविंद सिंह को राहत, डकैती और व्यपहरण प्रभावित क्षेत्र अधिनियम को चुनौती देने वाली याचिका में संशोधन की अनुमति
ग्वालियर हाईकोर्ट ने कांग्रेस नेता डॉ. गोविंद सिंह की याचिका में संशोधन की अनुमति दी। डकैती और व्यपहरण प्रभावित क्षेत्र अधिनियम 1981 को चुनौती देने का मामला।
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की ग्वालियर खंडपीठ ने कांग्रेस के वरिष्ठ नेता एवं पूर्व नेता प्रतिपक्ष डॉ. गोविंद सिंह की याचिका में संशोधन करने की अनुमति दे दी है। यह याचिका मध्य प्रदेश डकैती और व्यपहरण प्रभावित क्षेत्र अधिनियम, 1981 की संवैधानिक वैधता को चुनौती देने से संबंधित है।
अदालत ने याचिकाकर्ता की ओर से प्रस्तुत संशोधन आवेदन स्वीकार करते हुए याचिका में नई राहत जोड़ने की अनुमति दी है। इसके बाद संशोधित याचिका पर संबंधित प्रतिवादियों को नोटिस जारी करने का निर्देश दिया गया है।
हाईकोर्ट ने याचिका में संशोधन की दी अनुमति
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की ग्वालियर खंडपीठ में डॉ. गोविंद सिंह की ओर से एक आवेदन प्रस्तुत किया गया था।
इस आवेदन में याचिका की राहत संबंधी प्रार्थना में संशोधन करने और राहत क्रमांक 1-ए जोड़ने की अनुमति मांगी गई थी।
अदालत ने मौखिक अनुरोध स्वीकार करते हुए याचिका में संशोधन की अनुमति प्रदान की।
इसके साथ ही संशोधित याचिका पर प्रतिवादियों को नोटिस जारी करने का निर्देश दिया गया।
क्या है पूरा मामला?
यह मामला मध्य प्रदेश डकैती और व्यपहरण प्रभावित क्षेत्र अधिनियम, 1981 से जुड़ा हुआ है।
कांग्रेस नेता डॉ. गोविंद सिंह ने इस कानून की संवैधानिक वैधता को चुनौती देते हुए हाईकोर्ट में याचिका दायर की है।
याचिका में संबंधित अधिनियम को असंवैधानिक घोषित करने की मांग की गई है।
अब अदालत की अनुमति के बाद याचिका में नई राहत जोड़ी जा सकेगी।
महत्वपूर्ण बात यह है कि हाईकोर्ट ने अभी अधिनियम को असंवैधानिक घोषित नहीं किया है। अदालत का वर्तमान आदेश केवल याचिका में संशोधन की अनुमति से संबंधित है।
राज्य सरकार को देना होगा जवाब
रिपोर्ट के अनुसार, संशोधित याचिका के संबंध में राज्य सरकार को संबंधित तथ्यों और आंकड़ों के साथ अपना जवाब प्रस्तुत करना होगा।
मंगलवार को हुई सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से जवाब दाखिल करने के लिए एक महीने का समय मांगा गया।
इससे पहले 8 सितंबर 2026 को न्यायमूर्ति जीएस अहलूवालिया की पीठ के समक्ष याचिका में संशोधन के आवेदन पर सुनवाई हुई थी।
याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता विवेक कृष्ण तन्खा ने पक्ष रखा था।
रिपोर्ट के अनुसार, उन्होंने अदालत को बताया था कि आवेदन में राहत संबंधी प्रार्थना को सही ढंग से प्रस्तुत नहीं किया गया था।
अब आगे क्या होगा?
हाईकोर्ट द्वारा संशोधन की अनुमति मिलने के बाद याचिका में नई राहत जोड़ी जाएगी।
इसके बाद संबंधित प्रतिवादियों को संशोधित याचिका पर अपना पक्ष रखने का अवसर मिलेगा।
राज्य सरकार के जवाब और आगे की सुनवाई के आधार पर मामले की न्यायिक प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।
हालांकि, अधिनियम की संवैधानिक वैधता पर अंतिम निर्णय कब आएगा, इसकी जानकारी फिलहाल उपलब्ध नहीं है।
ग्वालियर की राजनीति और कानूनी मामलों में चर्चा
डॉ. गोविंद सिंह मध्य प्रदेश कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं में शामिल हैं और प्रदेश विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष रह चुके हैं।
उनकी ओर से डकैती और व्यपहरण प्रभावित क्षेत्र अधिनियम, 1981 को चुनौती देने वाली याचिका में संशोधन की अनुमति मिलने के बाद अब राज्य सरकार के जवाब और आगे की सुनवाई पर नजर रहेगी।
Digital Gwalior News इस मामले में आने वाले अगले न्यायिक आदेशों और महत्वपूर्ण घटनाक्रमों की जानकारी पाठकों तक पहुंचाता रहेगा।
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