ग्वालियर में एजी पुल की मरम्मत अटकी। PWD की सख्त शर्तों के कारण चार बार टेंडर के बावजूद ठेकेदार नहीं मिला।
ग्वालियर में एजी पुल की मरम्मत अटकी। PWD की सख्त शर्तों के कारण 4 बार टेंडर के बाद भी ठेकेदार नहीं मिला। जानिए पूरी खबर।
Gwalior News Today: ग्वालियर में एजी पुल सहित शहर के अन्य पुलों की मरम्मत का काम लंबे समय से अटका हुआ है। लोक निर्माण विभाग (PWD) द्वारा चार बार टेंडर प्रक्रिया आयोजित किए जाने के बावजूद अब तक ठेकेदार का चयन नहीं हो सका है। इसकी प्रमुख वजह विभाग की सख्त तकनीकी और पात्रता संबंधी शर्तें बताई जा रही हैं। अब विभाग इन नियमों में ढील देकर नए सिरे से टेंडर प्रक्रिया शुरू करने की तैयारी कर रहा है।
ग्वालियर में एजी पुल की मरम्मत क्यों अटकी?
मध्य प्रदेश के ग्वालियर शहर में एजी पुल समेत कई पुलों की मरम्मत को लेकर महत्वपूर्ण जानकारी सामने आई है। नईदुनिया की 21 अक्टूबर 2026 की रिपोर्ट के अनुसार, मरम्मत कार्य के लिए लगातार चार बार टेंडर प्रक्रिया आयोजित की गई, लेकिन ठेकेदार का चयन नहीं हो पाया।
रिपोर्ट के मुताबिक, पीडब्ल्यूडी की कड़ी निविदा शर्तों के कारण कई योग्य ठेकेदार तकनीकी मूल्यांकन में बाहर हो रहे हैं। परिणामस्वरूप मरम्मत का काम आगे नहीं बढ़ पा रहा है।
चार बार टेंडर निकालने के बावजूद नहीं मिला ठेकेदार
एजी पुल की मरम्मत के लिए विभाग की ओर से चार बार टेंडर प्रक्रिया शुरू की गई, लेकिन हर बार ठेकेदार चयन की प्रक्रिया असफल रही।
सामान्य तौर पर सरकारी निर्माण और मरम्मत कार्यों के लिए निर्धारित तकनीकी योग्यता, अनुभव और अन्य पात्रता शर्तों को पूरा करना आवश्यक होता है।
हालांकि, ग्वालियर में पुलों की मरम्मत के मामले में यही शर्तें ठेकेदार चयन के रास्ते में बाधा बनती दिखाई दे रही हैं।
चार प्रयासों के बाद भी ठेकेदार नहीं मिलना विभाग के सामने बड़ी चुनौती बन गया है।
PWD की सख्त शर्तों से तकनीकी मूल्यांकन में बाहर हो रहे ठेकेदार
इस पूरे मामले में सबसे महत्वपूर्ण पहलू निविदा प्रक्रिया की तकनीकी शर्तें हैं।
रिपोर्ट के अनुसार, प्रदेश के कई योग्य ठेकेदार भी पीडब्ल्यूडी द्वारा निर्धारित शर्तों को पूरा नहीं कर पा रहे हैं। इसके चलते उन्हें तकनीकी मूल्यांकन के दौरान ही टेंडर प्रक्रिया से बाहर होना पड़ रहा है।
इस स्थिति के कारण ठेकेदारों की भागीदारी प्रभावित हो रही है और मरम्मत कार्य के लिए उपयुक्त एजेंसी का चयन नहीं हो पा रहा है।
विशेषज्ञता और निर्माण गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए तकनीकी शर्तें आवश्यक होती हैं। लेकिन यदि पात्रता मानदंडों के कारण पर्याप्त प्रतिस्पर्धा नहीं हो रही है, तो उनकी व्यावहारिक समीक्षा करना भी जरूरी हो सकता है।
अब नियमों में ढील देकर दोबारा टेंडर निकालने की तैयारी
लगातार चार बार टेंडर प्रक्रिया सफल नहीं होने के बाद अब लोक निर्माण विभाग नियमों में बदलाव करने की तैयारी कर रहा है।
रिपोर्ट में बताया गया है कि विभाग निविदा की शर्तों में ढील देकर नए सिरे से टेंडर प्रक्रिया शुरू कर सकता है।
इस बदलाव से अधिक योग्य ठेकेदारों को भाग लेने का अवसर मिलने की संभावना है।
हालांकि, नियमों में किस प्रकार की राहत दी जाएगी और नया टेंडर कब जारी होगा, इसकी स्पष्ट जानकारी उपलब्ध रिपोर्ट में नहीं दी गई है।
पुलों की मरम्मत में देरी से उठ रहे कई सवाल
ग्वालियर में एजी पुल सहित अन्य पुलों की मरम्मत अटकने के कारण अब टेंडर प्रक्रिया और विभागीय तैयारियों को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
लगातार चार बार टेंडर प्रक्रिया असफल रहने के बाद यह समझना जरूरी है कि निविदा की शर्तों में क्या व्यावहारिक कठिनाइयां हैं और उन्हें किस प्रकार दूर किया जा सकता है।
साथ ही, मरम्मत कार्य में देरी के बावजूद पुलों की संरचनात्मक सुरक्षा और निर्माण गुणवत्ता से जुड़े आवश्यक मानकों से समझौता नहीं किया जाना चाहिए।
ग्वालियर के लोगों को कब मिलेगी राहत?
एजी पुल की मरम्मत कब शुरू होगी, यह फिलहाल स्पष्ट नहीं है।
यदि विभाग संशोधित शर्तों के साथ नई टेंडर प्रक्रिया सफलतापूर्वक पूरी कर लेता है, तो मरम्मत कार्य को आगे बढ़ाने का रास्ता खुल सकता है।
इसके लिए पहले ठेकेदार का चयन और आवश्यक विभागीय प्रक्रियाओं का पूरा होना जरूरी होगा।
अब सभी की नजर इस बात पर रहेगी कि पीडब्ल्यूडी नई निविदा कब जारी करता है और पुलों की मरम्मत शुरू करने के लिए क्या समयसीमा निर्धारित की जाती है।
निष्कर्ष
ग्वालियर में एजी पुल की मरम्मत का मामला फिलहाल टेंडर प्रक्रिया में आई बाधाओं के कारण अटका हुआ है। चार बार प्रयास करने के बावजूद ठेकेदार नहीं मिलने से विभाग को अब अपनी निविदा शर्तों की समीक्षा करनी पड़ रही है।
नई टेंडर प्रक्रिया के सफल होने पर मरम्मत कार्य शुरू होने की उम्मीद की जा सकती है। हालांकि, फिलहाल किसी निश्चित तारीख की पुष्टि नहीं हुई है।
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